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  आपका शरीर कैसे काम करता है। जब सेक्स की बात आती है तो हर कोई अलग-अलग चीजें पसंद करता है, इसलिए इस बारे में चिंता न करें कि आप "सामान्य" हैं या नहीं।  लोग सेक्स कैसे करते हैं?  सेक्स एक आकार सभी के लिए उपयुक्त नहीं है। हो सकता है कि जो आपको अच्छा लगे वह किसी और के लिए सही न हो। जब यौन व्यवहार और इच्छाओं की बा त आती है तो हर कोई अलग होता है, लेकिन यहां कुछ सामान्य प्रकार की यौन गतिविधियां हैं: 1.अकेले या साथी के साथ हस्तमैथुन करना  2.मौखिक, योनि और गुदा मैथुन  3.चुंबन 4.अपने शरीर को एक साथ रगड़ना 5.सेक्स टॉयज का इस्तेमाल करना  6.फोन सेक्स या "सेक्सटिंग"  7.पोर्न पढ़ना या देखना  लोग अलग-अलग चीजों से आकर्षित होते हैं, इसलिए आपको क्या पसंद है या क्या नहीं, इस बारे में संवाद करने से आपके साथी को पता चलता है कि क्या ठीक है और क्या बंद है।  क्या सेक्स आपके लिए अच्छा है?  एक स्वस्थ यौन जीवन आपके लिए भावनात्मक और शारीरिक रूप से दोनों के लिए अच्छा है। सेक्स आपको किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध बनाने में मदद कर सकता है, और यौन सुख के बहुत सारे ...

What is Mercantalism in Hindi ( वणिकवाद )

वणिकवाद Mercantalism शब्द का अर्थशास्त्र मे प्रयोग सबसे पहले एडम स्मिथ adam Smith ने किया । उन्होंने अपनी पुस्तक The Wealth of Nations मे वणिकवाद  की अलोचना की थी। फ्रांस के वित्त मन्त्री काल्बर्ट इस विचारधारा के समर्थक थे, इसीलिये वणिकवाद को काल्बर्ट 
colbertism के नाम से भी जाना जाता है।




व्यापारिक कार्यकलापो तथा व्यापारी वर्ग की प्रधानता के कारण इसे वणिकवादी प्रथा Mercantile System या वणिकवाद Mercantalism के नाम से भी जाना जाता है।

कभी-कभी इसे व्यापारिक प्रथा Commercial System
भी कहा जाता है।

इस विचारधारा मे स्वतंत्र व्यापार को अनावश्यक ठहरा कर
व्यापार पर सरकारी नियन्त्रण का समर्थन किया गया है।
जिस कारण इसे प्रतिबन्धक प्रथा ( Restrictive System ) के नाम से जाना जाता है।

सोने-चाँदी को अत्यधिक महत्व देने के कारण इसका नाम धातुवाद Bullionism भी पड़ गया था ।  मगर प्रो० हैने 
के मतानुसार वणिकवाद  Mercantalism शब्द इसके लिए सबसे अधिक उपयुक्त है।


नव-वणिकवाद

नव-वणिकवाद मुक्त व्यापार के विरोध मे उत्पन्न हुआ और इसके मूल मे अर्थव्यवस्था का पुननिर्माण है नव-वणिकवाद

से अभिप्राय व्यापारवादी विचारधारा के पुनः आगमन से है,
व्यापारवाद का सर्वथा नाश नही हुआ था। उसके मूल विचार अभी भी है। 18 वीं शताब्दी की समाप्ति तक उग्र वणिकवाद
का अन्त हो गया था।

इसके बाद प्रकृतिवाद व प्रतिष्ठित सम्प्रदाय की विचारधाराओं की पुनरावृत्ति होने लगी, जिसे नव-वणिकवाद कहा जाने लगा।

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