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  आपका शरीर कैसे काम करता है। जब सेक्स की बात आती है तो हर कोई अलग-अलग चीजें पसंद करता है, इसलिए इस बारे में चिंता न करें कि आप "सामान्य" हैं या नहीं।  लोग सेक्स कैसे करते हैं?  सेक्स एक आकार सभी के लिए उपयुक्त नहीं है। हो सकता है कि जो आपको अच्छा लगे वह किसी और के लिए सही न हो। जब यौन व्यवहार और इच्छाओं की बा त आती है तो हर कोई अलग होता है, लेकिन यहां कुछ सामान्य प्रकार की यौन गतिविधियां हैं: 1.अकेले या साथी के साथ हस्तमैथुन करना  2.मौखिक, योनि और गुदा मैथुन  3.चुंबन 4.अपने शरीर को एक साथ रगड़ना 5.सेक्स टॉयज का इस्तेमाल करना  6.फोन सेक्स या "सेक्सटिंग"  7.पोर्न पढ़ना या देखना  लोग अलग-अलग चीजों से आकर्षित होते हैं, इसलिए आपको क्या पसंद है या क्या नहीं, इस बारे में संवाद करने से आपके साथी को पता चलता है कि क्या ठीक है और क्या बंद है।  क्या सेक्स आपके लिए अच्छा है?  एक स्वस्थ यौन जीवन आपके लिए भावनात्मक और शारीरिक रूप से दोनों के लिए अच्छा है। सेक्स आपको किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध बनाने में मदद कर सकता है, और यौन सुख के बहुत सारे ...

What is bookkeeping in Hindi? ( बही-खाता या बुककीपिंग किसे कहते हैं? )

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बही-खाता या बुककीपिंग एक ऐसी पद्धति है जिसमें किसी कम्पनी, गैर–लाभकारी संगठन या किसी व्यक्ति के वित्तीय लेनदेन के आंकड़ों का प्रतिदिन के आधार पर भंडारण, रिकॉर्डिंग और पुनर्प्राप्त करना, विश्लेषण और व्याख्या करने की प्रक्रिया शामिल होती है। इस प्रक्रिया में बिक्री, प्राप्तियां, लेनदेन में खरीद, और किसी व्यक्ति/निगम/संगठन द्वारा भुगतान आदि सम्मिलित किए जाते हैं। बुककीपिंग, एक बुककीपर द्वारा किया जाता है जो किसी व्यवसाय के प्रतिदिन के वित्तीय लेनदेन को रिकॉर्ड करता है। प्रक्रिया के लिए शुद्धता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि व्यक्तिगत वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड सही, व्यापक और अद्यतन (अप–टू–डेट) हैं। प्रत्येक लेनदेन, चाहे वह बिक्री हो या खरीद हो, दर्ज किया जाना चाहिए। बुक कीपिंग के लिए स्थापित संरचनाएं होती हैं जिन्हें ‘गुणवत्ता नियंत्रण‘ कहा जाता है। ये संरचनाएँ समय–समय पर वित्तीय लेनदेन के भंडारण, रिकॉर्डिंग और पुनर्प्राप्ति और सटीक रिकॉर्ड सुनिश्चित करने में सहायता करतीं हैं। 'बही-खाता' दो प्रविष्टियों वाली (डबल इंट्री) पुस्तपालन (बुककीपिंग) ...

What is Definition of Market

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Definition of Market ( बाजार की परिभाषा ) As a body of person in such commercial relations that each can easily acquaint himself with the rates at which certain in kinds of exchange of goods are services are from time to time made by the others.. Economists understand by the term market not any particular market place in which things are bought and sold, but the whole of any region in which buyers and sellers are in such free intercourse with one- another that the price of the same goods tend to Equality, easily and quickly. We mean by market the general field within which forces determining the price of a particular commodity operate. The word has been generalized so as the means by body of persons who are in intimate business relations and carry extensive transactions in any commodity. thank u for read

What is Gresham's Law in Hindi (ग्रेशम का नियम)

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हम व्यवहार मे देखते है कि मनुष्य का यह स्वभाव है कि वह अच्छी वस्तु को अपने पास रखना चाहता है जबकि खराब वस्तु को पहले ही उपभोग करना चाहता है या दूसरों को देना चाहता है। ग्रेशम का नियम मनुष्य की इसी मनोवैज्ञानिक प्रवृति पर आधारित है।यदि देश मे अनेक प्रकार की मुद्राएं हो तो उनमें से कुछ अच्छी मुद्राऐ हो सकती है औऱ कुछ बुरी। ऐसी दशा मे मनुष्य अपने स्वभाव के अनुसार अच्छी मुद्रा को अपने पास रखेगा औऱ घटिया मुद्रा दूसरों को देगा जिससे प्रचलन मे केवल बुरी मुद्रा ही रहेगी।मुद्रा चलन मे मानव स्वभाव की इस प्रवृति को सर टॉमस ग्रेशम ने एक नियम के रूप मे व्यक्त किया है  जिसे 'ग्रेशम का नियम'  कहा जाता है।। बढ़िया सिक्के------- When in a country two or more kinds of money circulate at the same time , bad money tends to drive good money out of circulation. ---------SIR THOMAS GRESHAM महारानी एलिजाबेथ प्रथम (Elizabeth 1) के पूर्व इंग्लैंड मे विभिन्न आकार-प्रकार व वजन के सिक्के चलन मे थे , जिनमें से अधिकांश सिक्के घिसकर खराब हो चुके थे। महारानी इन सिक्कों को हटाना चहती थी। अतः उन्हो...

What is Barter system in Hindi (वस्तु विनिमय प्रणाली)

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जब आर्थिक विकास के शुरू मे समाज मूलतः आत्मनिर्भर था। मानव की आवश्यकता बहुत सरल औऱ सीमित थी, जिसकी पूर्ति वह स्वम अथवा अपने परिवार के सहयोग से सरलता से कर लेता था। किन्तु सभ्यता के विकास औऱ ज्ञान की वृद्धि एवं आर्थिक परिस्थिति मे होने वाले परिवर्तन के परिणाम स्वरूप इनसानी आवश्यकताओ मे वृद्धि होने लगी औऱ मानव के लिए अपनी सभी आवश्यकताओ की स्वयं पूर्ति करना असम्भव हो गया। अब वह केवल उन्हीं वस्तुओ का उत्पादन करने लगा जिसके उत्पादन मे वह कुशल था। फिर अपने उत्पादन की अतिरिक्त इकाई का आवश्यक वस्तुओं से विनिमय(exchange) करने लगा। वस्तुओं के इस विनिमय को ही "वस्तु विनिमय" (Barter System) कहते है। Example: एक किसान अपने द्वारा उत्पादित चावल किसी व्यापारी को देकर धान आदि प्राप्त कर लेता है या कोई एसी वस्तु जिसकी उसको आवश्यकता हो। इसे Barter system कहते है। आशा करता हू आप को वस्तु विनिमय प्राणाली समझ आइ होगी।।।।

What is Quantity theory of money in Hindi (मुद्रा परिमाण सिध्दान्त )

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मुद्रा परिमाण सिध्दान्त , मुद्रा के मूल्य निर्धारण का अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धांत है। सामान्यतः यह धारणा है कि 16वीं शताब्दी मे इटली के अर्थशास्त्री दवन जत्ती (Davan zatti) ने सर्व प्रथम इस सिध्दान्त का प्रतिपादन किया। इस सिध्दान्त की क्रमबध्द व्याख्या अंग्रेज विचारक जॉन लॉक (john lock) ने 1691 मे की । इसके बाद समय समय पर इस सिध्दान्त मे संंशोधन किये गये। 1752 मे डेविड ह्यूम (David Hume) ने इस सिध्दान्त की व्याख्या की। उसके बाद एडम स्मिथ , रिकार्डो , जे. एस. मिल आदि प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री यो ने इस सिध्दान्त के सम्बंध मे अपने विचार व्यक्त किए। इस सिध्दान्त की आधुनिक एवं विस्तृत व्याख्या अमेरिकन अर्थशास्त्री इरविंग फिशर (Irving Fisher) द्वारा 1911 मे प्रकाशित उनकी पुस्तक "The Purchasing power of money" मे की गई है। इसीलिए इसे फिशर का परिमाण सिध्दान्त के नाम से जाना जाता है। यदि मुद्रा की मात्रा को दुगना कर दिया जाए तो वस्तुओं के मूल्य पहले की तुलना मे दुगने हो जाए गे औऱ मुद्रा का मूल्य आधा औऱ यदि मुद्रा की मात्रा को आधा कर दिया जाए तो वस्तुओं के मूल्य पहले से आधे रह ...

How does possible Changes in the value of money in Hindi (मुद्रा के मूल्य परिवर्तन) Inflation, Deflation and Devaluation

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मुद्रा के मूल्य मे सामान्यता परिवर्तन होता रहता है। मुद्रा के मूल्य मे परिवर्तन से अभिप्राय मुद्रा की क्रयशक्ति के घटने-बढ़ने से है।मुद्रा के मूल्य मे परिवर्तन का देश की अर्थव्यवस्था पर कभी अनुकूल तो कभी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इन परिवर्तनो का देश के उपभोग, उतपादन , वितरण तथा रोजगार एवं समूची अर्थव्यवस्था पर अत्यन्त व्यापक एवं गहरा प्रभाव पड़ता है। अतः मुद्रा के मूल्य मे होने वाले विभिन्न परिवर्तन के स्वरूप तथा स्वभाव का अध्ययन बहुत ज़रूरी है।। 1- Inflation Inflation का अर्थ स्फीती(फैलाव) है  जिस प्रकार साईकिल का tyre हवा भरने देने से फैलता है ठीक उसी प्रकार जब देश मे मुद्रा की मात्रा मे फैलाव किया जाता है अर्थात जब सरकार या केन्द्रीय बैंक आवश्यकता से अधिक मुद्रा का निर्गमन कर देती है तो इसे मुद्रा-स्फीती या मुद्रा-प्रसार कहते है।।        प्रारंभ मे मुद्रा निर्गमन के पीछे रखे जा ने  वाले सुरक्षित कोष के अनुपात की तुलना मे अधिक मुद्रा निकाल देने को ही मुद्रा प्रसार समझा जाता था। बाद मे इसका प्रयोग उस स्थिति के लिए किया जाने लगा जबकि चलन मे मुद्रा की...

What is Value of money in Hindi (मुद्रा का मूल्य)

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सभी वस्तुओ एवं सेवाओं के मूल्य मुद्रा के रुप मे ही व्यक्त किए जाते है इसका मतलब वस्तु औऱ सेवाओं के मूल्य को मुद्रा मे मापा जाता है। लेकिन मुद्रा के मूल्य को अन्य वस्तुओं के मूल्य की तरह नही मापा जा सकता।  वास्तव मे मुद्रा का अपना कोई मूल्य नहीं होता, इसमें वस्तुओ तथा सेवाओ को प्राप्त करने की शक्ति होती है औऱ यही क्रय शक्ति ही मुद्रा का मूल्य कहलाती है।।। मुद्रा का मूल्य मुद्रा की क्रयशक्ति होती है औऱ उसे वस्तु औ   के सामान्य मूल्य स्तर से जाना जा सकता है तथा मुद्रा के रूप मे जब तक कोई परिवर्तन नही होता , जब तक वस्तुओं औऱ सेवाओं के सामान्य मूल्य स्तर भी स्थिर रहते है।। मुद्रा के मूल्य से हमारा आशय उन वस्तुओं की उस मात्रा से है जो सामान्य मुद्रा की एक इकाई के बदले मे प्राप्त  होती है।। किसी विशेष स्थिति मे मुद्रा कि क्रयशक्ति, वस्तुओं औऱ सेवाओं की उस मात्रा पर निर्भर होती है जो मुद्रा की एक इकाई क्रय कर सकती है।। मुद्रा मूल्य का आशय ।जैसे वस्तु बाजार मे वस्तुओं का क्रय विक्रय होता है, वैसे ही मुद्रा बाजार मे मुद्रा का भी क्रय विक्रय होता है।ऋणदाता मुद्रा का...

What is Money in Hindi (मुद्रा)

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Money(मुद्रा) sabse jiyada सुपरिचित वस्तुओं me se Ek hai आज मुद्रा हमारे आर्थिक जिन्दगी का एक आवश्यक एवं अभिन्न अंग है प्राचीन काल मे विश्व के लगभग सभी देशो मे जानवरो को मुद्रा के रूप मे use करते थे रोम मे भी ऐसा ही हुआ था। इसी लिए मुद्रा औऱ पशु एक ही meaning मे इस्तेमाल हुए अर्थात मुद्रा "पशु सम्पत्ति"का रूप है। इसी लिए हम मानते है कि मुद्रा शब्द अति पुरातन काल से ही जानते है। 1-मुद्रा एक ऐसी वस्तु है जो अन्य वस्तु औ के मूल्यों के भुगतान मे या फिर दूसरे व्यावसायिक दायित्व को निपटाने मे विस्तृत रूप से स्वीकार कि जाती है। 2-मुद्रा वह वस्तु है जो मुद्रा का कार्य करें।। 3-मुद्रा मे उन सभी वस्तुओं का समावेश(mixture) होता है जो किसी भी समय या स्थान मे बिना किसी सन्देह doubt औऱ जांच-पड़ताल के वस्तुओं औऱ सेवाओं को खरीदने औऱ भुगतान करने के साधन के रूप मे accept की जाती है।। इस प्रकार उचित दृष्टिकोण के अनुसार केवल धातु मुद्रा औऱ पत्र-मुद्रा को ही मुद्रा मान सकते है।। 4-कोई भी वस्तु जो राज्य द्वारा मुद्रा घोषित कर दी जाती है, मुद्रा कहलाती है।। 5-मुद्रा वह वस्तु है जो मू...

What is Paper Currency standard in Hindi (पत्र मुद्रामान)

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Paper Currency standard का अभिप्राय उस मौद्रिक व्यावस्था से है जिसके अन्तर्गत देश की प्रमुख मुद्रा कागजी नोटों के रूप मे होती है। इसके पीछे कोई धातु कोष नहीं रखा जाता है, यदि रखा भी जाता है तो नाम मात्र के लिए।इस प्रकार इस मान मे प्रचलित मुद्रा का स्वर्ण अथवा रजत से कोई धात्विक सम्बंध नहीं होता है यह.कागजी मुद्रा असीमित विधिग्राह्य तथा अपरिवर्तनशील होती है। छोटे भुगतान के लिए घटिया धातु के सिक्के, सांकेतिक एवं सीमित विधिग्राह्य मुद्रा के रूप मे चलन मे होते है। यह मुद्रा Goverment की साख पर प्रचलित रहती है, इसीलिए इसे साखमान भी कहतेहै।। पत्र-मुद्रामान मे देश की प्रधान मुद्रा पत्र-मुद्रा ही होती है । देश का समपूर्ण लेन देन पत्र मुद्रा मे ही होता है तथा छोटे भुगतान के लिए घटिया धातु की मुद्राऐ सहायक मुद्रा के रूप मे प्रचलित होती है पत्र मुद्रा का निर्गमन एवं नियमन goverment के विशेष कानून law द्वारा होता है इसका उद्देश्य है कि न तो मुद्रा की कमी हो औऱ न ही मुद्रा स्फीती की स्थिति उत्पन्न हो। भारत की पत्र मुद्रा- 5, 10, 20, 50, 100, 200, 500, 1000,2000 रूपए के नोट रिजर्व बैंक...

What is Meaning of Gold Standard in Hindi (स्वर्णमान)

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स्वर्णमान का तात्पर्य एक ऐसे मौद्रिकमान  से है जिसके अन्तर्गत देश मे प्रचलित प्रामाणिक मुद्रा स्वर्ण की बनी होती है तथा यदि किसी दूसरी धातु या पदार्थ की मुद्रा प्रचलन मे होती है तो उसका सम्बंध भी स्वर्ण से निर्धारित होता है औऱ वह स्वर्ण की एक निश्चित मात्रा मे परिवर्तनीय होती है। इस प्रकार स्वर्णमान मे सोना मूल्यमान का कार्य करता है औऱ सभी वस्तुओं के मूल्य उसके द्वारा मापे जाते है। स्वर्णमान  वह अवस्था है जिसमें कोई एक देश अपनी मुद्रा की एक इकाई का मूल्य औऱ सोने की एक निश्चित मात्रा का मूल्य एक-दूसरे के बराबर रखता है। स्वर्णमान  एक ऐसी व्यावस्था है जिसमें देश की प्रधान मुद्रा की एक इकाई, एक निश्चित प्रकार के सोने की एक निश्चित मात्रा मे बदली जा सकती है। स्वर्णमान वह पद्धती है जिसमें कीमतें, ऋण औऱ मजदूरी उसी मात्रा मे व्यक्त की जाती है औऱ उनका भुगतान उस मात्रा मे किया जाता है, जिसका मूल्य किसी स्वतंत्र बाजार मे एक निश्चित, स्वर्ण मात्रा के बराबर होता है। स्वर्णमान के अन्तर्गत स्वर्ण का मूल्य मुद्रा मे निश्चित कर दिया जाता है औऱ इस प्रकार स्वर्ण तथा मुद्रा मे ...

What is Definition of Monetary standard (मुद्रामान) and Standard of value(मूल्यमान) in Hindi

मुद्रामान वस्तु मुद्रा युग मे मुद्रा मान से हमारा अभिप्राय उस वस्तु से था जिसमे क्रयशक्ती व्यक्त की जाती थी धातु मुद्रा काल मे मुद्रामान का अर्थ उस धातु से लिए जाता था जिसमें देश के प्रामाणिक सिक्के बनाए जाते थे। वर्तमान समय मे मुद्रामान एक बहुत बड़ा शब्द है जिसके अन्तर्गत मुद्रा पदार्थ, नियमन विधि एवं संचालन व्यावस्था का सम्पूर्ण अध्ययन आ जाता है। मुद्रा मान प्रामाणिक मुद्रा की मात्रा तथा उसके विनिमय मूल्य के नियमय की प्रणाली है। मुद्रामान किसी देश की सम्पूर्ण मौद्रिक व्यावस्था को कहते है। जिसके अन्तर्गत देश मे चलने वाली मुद्राऔ  का प्रकार, रक्षित कोष, उनकी परिवर्तनशीलता  तथा  मुद्रा सम्बंधित सभी नियम व व्यवस्थाएं सम्मिलित होती. मूल्य -मान मूल्यमान से आशय उस मौद्रिक इकाई से है जो मूल्य मापन के आधार के रूप मे कार्य करती है तथा जिसमे किसी देश की समस्त वस्तुओं तथा सेवाओं का मूल्य मापा जाता है जैसे अमेरिका मे डॉलर, रूस मे रूवल, इंग्लैंड मे पौण्ड,जर्मनी मे मार्क, फ्रांस मे फ्रैंक तथा भारत मे रूपया मूल्य मापक के उदाहरण है।।। इसी प्रकार मुद्रामान एक व्यापक शब्द ह...

What is Monetary Standard in INDIA in Hindi (मुद्रामान)

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धातु  मुद्रामान  प्राचीन भारत मे सोने औऱ चांदी की मुद्राऔ का प्रयोग किया जाता था। इसका प्रमाण प्राचीन ग्रन्थो मे मिलते है। इतिहास से स्पष्ट होता है कि सन् 1835 मे जब ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने भारत की बागडोर सम्भाली तो उस समय देश के विभिन्न भागों मे 994 प्रकार के विभिन्न वजन व शुध्दता वाले सोने औऱ चांदी के सिक्के का प्रचलन था। इस प्रकार सन् 1835 तक भारत मे द्वी-धातुमान प्रचलित था।।। रजतमान सन् 1835 मे ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने चलन अधिनियम currency act पारित कर अपने अधीन क्षेत्रों के अन्तर्गत प्रचलित सिक्को मे एकरूपता स्थापित की । एक तोला या 18 ग्रेन वजन वाले चांदी के सिक्के को प्रामाणिक सिक्का(प्रधान मुद्रा)घोषित किया गया। इस सिक्के मे 165ग्रेन शुध्द चांदी थी औऱ 15 ग्रेन खोट होता था। पत्र मुद्रा तथा अन्य धातुओं के सिक्के भी चलन मे थे, जो चांदी मे परिवर्तनीय होते थे। 1873 तक रजतमान भारत मे सुचारू रूप से चलता रहा। इसके बाद , मैक्सिको मे चांदी की नई खानो का पता चला तथा अनेक देशों द्वारा रजतमान का त्याग कर स्वर्णमान या द्वि-धातुमान अपनाने के कारण रजत(चांदी) पूर्ति मे अधिक वृद्...

What is Metallic money (coins) and coinage in Hindi (धातु मद्रा तथा सिक्का-ढलाई)

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Metallic money Uss money  ko Kehte Hain Jo Kisi  metal Ki Bani hoti hai aur government dwara money ghoshit kar di Jati Hai saaf saaf language Mein Hum keh sakte hain Ki jab  Sarkar Kisi metal ke nischit wajan ya Akar Prakar ke Tukdon par government sign laga deti hai. fir usse money ghoshit kar deti hai ....तो ये धातु के टुकड़े ही, धातु मुद्रा metallic money kehlaate hai...... Metallic money per public bahut believe karti hai .... Kyunki ki isme print money value metal ke  value ke barabar Hota Hai Metallic money ka sabse bada fayda  ye hota hai ki Hua jaldi kharab Nahin Hota Hai Chahe  summer Ho winter ho ya mansoon Ho.. isiliye Ye ja jaldi damage Nahin Hota but paper currency Pani Aur Aag Mein Jaldi nasht ho Jate Hain Mera matlab hai jaldi kharab ho Jate Hain matellic money Agar damage Ho Jaaye ya kharab ho jaaye to usse old coin ko heat Karke a fir se new money made kar sakte hain ..doosri currency me ye quality nahi hoti hai.. Samay ki sh...

What is Definition of Exchange in Hindi ( विनिमय की परिभाषा)

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वस्तुओं औऱ सेवाओं के आदान-प्रदान या लेन-देन को विनिमय कहा जाता है । दो पक्षो के बीच होने वाले ऐच्छिक , वैधानिक तथा पारस्परिक धन के हस्ताक्षर को ही विनिमय कहते है। तुलनात्मक अतिरेक वस्तु(कम आवश्यक वस्तु) का तुलनात्मक आवश्यक वस्तु के साथ अदला-बदली विनिमय होता है। हम दो पक्ष, एक-दुसरे के  उपलक्ष मे स्वामित्व के एच्छिक हस्तांतरण के रूप मैं विनिमय को परिभाषित करते है। किसी वस्तु या सेवा का आदान-प्रदान या विनमय करने के लिए दो व्यक्ति का होना आवश्यक है चूंकि विनिमय मे धन का हस्ताक्षर ऐच्छिक होता है इसी लिए जब तक दोनो पक्षों को विनिमय से लाभ नहीं होगा। प्रत्येक क्रिया मे वस्तुओं. एवं सेवाओं का हस्तांतरण होता हैं। वस्तुओं औऱ सेवाओं का ऐच्छिक हस्तांतरण होना चाहिए अर्थात विनिमय करते समय किसी प्रकार का दबाव नही होना चाहिए। वस्तुओं एवं सेवाओं के हस्तांतरण का कार्य वैधानिक तथा पारस्परिक होना चाहिए। Example  Ram apni old books Kisi shopkeeper ko 20 rupaye Mein sale kar deta hai ..yeah Exchange kehlata  Hai Kyunki Ram ne apni Pustak sale ki hai aur dukandar ne Badle Mein...

What is Meaning of Production cost and revenue in Hindi (उत्पादन लागत एंव आगम)

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साधारण बोलचाल की भाषा मे उत्पादन लागत का अर्थ उन समस्त लागतो से होता है, जिन्हें एक उत्पादक श्रम, पून्जी एवं अन्य उपादानो के बदले पुरस्कार के रूप मे देता है। यदि कोई उत्पाद या वस्तु जिसे उत्पादक स्वयं अपने पास से देता है, उसकी लागत को उत्पादन लागत मे शामिल नहीं करते है लेकिन अर्थशास्त्र मे उत्पादन लागत cost of production के अन्तर्गत केवल अन्य व्यक्तियों को किए गये भुगतान ही  सम्मिलित नहीं रखते है बल्कि उत्पादन के द्वारा स्वयं दिये गये उपादानो factors का पुरस्कार औऱ वस्तुओं की कीमत तथा उसका स्वयं अपना लाभ भी सम्मिलित रहता है। Example % उत्पादन लागत=भूमि का लगान+कच्चे माल की कीमत+मज़दूरो की मज़दूरी+पूँजी का ब्याज+संगठनों का वेतन+उधमी का सामान्य लाभ। किसी वस्तु के उत्पादन मे प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप मे लगाने वाले विभिन्न प्रकार के श्रमिकों का पारिश्रमिक तथा उसमें काम आनेवाली पूंजी के बचत के लिए किया जाने वाला त्याग अथवा प्रतीक्षा उस वस्तु की वास्तविक लागत होती है। आशा करता हू। आप को मेरी पोस्ट अच्छी लगी होगी

What is Mercantalism in Hindi ( वणिकवाद )

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वणिकवाद Mercantalism शब्द का अर्थशास्त्र मे प्रयोग सबसे पहले एडम स्मिथ adam Smith ने किया । उन्होंने अपनी पुस्तक The Wealth of Nations मे वणिकवाद  की अलोचना की थी। फ्रांस के वित्त मन्त्री  काल्बर्ट  इस विचारधारा के समर्थक थे, इसीलिये वणिकवाद को  काल्बर्ट  colbertism  के नाम से भी जाना जाता है। व्यापारिक कार्यकलापो तथा व्यापारी वर्ग की प्रधानता के कारण इसे वणिकवादी प्रथा Mercantile System या वणिकवाद Mercantalism के नाम से भी जाना जाता है। कभी-कभी इसे व्यापारिक प्रथा Commercial System भी कहा जाता है। इस विचारधारा मे स्वतंत्र व्यापार को अनावश्यक ठहरा कर व्यापार पर सरकारी नियन्त्रण का समर्थन किया गया है। जिस कारण इसे  प्रतिबन्धक प्रथा ( Restrictive System )  के नाम से जाना जाता है। सोने-चाँदी को अत्यधिक महत्व देने के कारण इसका नाम धातुवाद  Bullionism  भी पड़ गया था ।  मगर प्रो० हैने  के मतानुसार  वणिकवाद  Mercantalism  शब्द इसके लिए सबसे अधिक उपयुक्त है। नव-वणिकवाद नव-वणिकवाद मुक्त व्यापार के व...

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