Featured Post

Sex

Image
  आपका शरीर कैसे काम करता है। जब सेक्स की बात आती है तो हर कोई अलग-अलग चीजें पसंद करता है, इसलिए इस बारे में चिंता न करें कि आप "सामान्य" हैं या नहीं।  लोग सेक्स कैसे करते हैं?  सेक्स एक आकार सभी के लिए उपयुक्त नहीं है। हो सकता है कि जो आपको अच्छा लगे वह किसी और के लिए सही न हो। जब यौन व्यवहार और इच्छाओं की बा त आती है तो हर कोई अलग होता है, लेकिन यहां कुछ सामान्य प्रकार की यौन गतिविधियां हैं: 1.अकेले या साथी के साथ हस्तमैथुन करना  2.मौखिक, योनि और गुदा मैथुन  3.चुंबन 4.अपने शरीर को एक साथ रगड़ना 5.सेक्स टॉयज का इस्तेमाल करना  6.फोन सेक्स या "सेक्सटिंग"  7.पोर्न पढ़ना या देखना  लोग अलग-अलग चीजों से आकर्षित होते हैं, इसलिए आपको क्या पसंद है या क्या नहीं, इस बारे में संवाद करने से आपके साथी को पता चलता है कि क्या ठीक है और क्या बंद है।  क्या सेक्स आपके लिए अच्छा है?  एक स्वस्थ यौन जीवन आपके लिए भावनात्मक और शारीरिक रूप से दोनों के लिए अच्छा है। सेक्स आपको किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध बनाने में मदद कर सकता है, और यौन सुख के बहुत सारे ...

How does possible Changes in the value of money in Hindi (मुद्रा के मूल्य परिवर्तन) Inflation, Deflation and Devaluation

मुद्रा के मूल्य मे सामान्यता परिवर्तन होता रहता है। मुद्रा के मूल्य मे परिवर्तन से अभिप्राय मुद्रा की क्रयशक्ति के घटने-बढ़ने से है।मुद्रा के मूल्य मे परिवर्तन का देश की अर्थव्यवस्था पर कभी अनुकूल तो कभी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इन परिवर्तनो का देश के उपभोग, उतपादन , वितरण तथा रोजगार एवं समूची अर्थव्यवस्था पर अत्यन्त व्यापक एवं गहरा प्रभाव पड़ता है। अतः मुद्रा के मूल्य मे होने वाले विभिन्न परिवर्तन के स्वरूप तथा स्वभाव का अध्ययन बहुत ज़रूरी है।।



1- Inflation

Inflation का अर्थ स्फीती(फैलाव) है  जिस प्रकार साईकिल का tyre हवा भरने देने से फैलता है ठीक उसी प्रकार जब देश मे मुद्रा की मात्रा मे फैलाव किया जाता है अर्थात जब सरकार या केन्द्रीय बैंक आवश्यकता से अधिक मुद्रा का निर्गमन कर देती है तो इसे मुद्रा-स्फीती या मुद्रा-प्रसार कहते है।।
       प्रारंभ मे मुद्रा निर्गमन के पीछे रखे जा ने  वाले सुरक्षित कोष के अनुपात की तुलना मे अधिक मुद्रा निकाल देने को ही मुद्रा प्रसार समझा जाता था। बाद मे इसका प्रयोग उस स्थिति के लिए किया
जाने लगा जबकि चलन मे मुद्रा की मात्रा वस्तुऔ तथा सेवाऔ की मात्रा से अधिक हो जाती है एवं जिससे परिणामस्वरूप मुद्रा का मूल्य गिरने लगता है अर्थात वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों मे वृद्धि होने लगती है। वर्तमान समय मे मुद्रा प्रसार को रोजगार तथा आय की स्थिति से सम्बंधित किया गया है।।

2-Deflation

मुद्रा स्फीती की ठीक विपरीत स्थिति को मुद्रा-संकुचन या मुद्रा-अवस्फीती Deflation कहते है। मुद्रा अवस्फीती भी एक बहुत बड़ी आर्थिक बिमारी है । मुद्रा-संकुचन की स्थिति मे मुद्रा तथा साख की पूर्ति , मांग से कम रहती है, वस्तुओं के मूल्य मे कमी आने लगती है एवं मुद्रा की क्रय शक्ति मे वृद्धि होने लगती है अर्थात मुद्रा के मूल्य मे वृद्धि होने लगती है आसान शब्दों मे कह सकते है, मुद्रा-संकचन से देश मे आर्थिक मन्दी आ जाती है।।

3-Disinflation

जब देश मे मुद्रा स्फीती की स्थिति उत्पन्न हो जाने के कारण अर्थव्यवस्था असन्तुलित हो जाती है तो इसे सामान्य स्तर पर लाने के लिए मुद्रा की मात्रा मे क्रमशः कमी की जाती है । इस.प्रक्रिया को ही मुद्रा-अपस्फीती Disinflation कहते है।।।

4-Reflation

मुद्रा संकुचन के कारण वस्तुओं के मूल्यो मे गिरावट आ जाती है , देश मे बेरोजगारी बढ़ जाती है, उधोग ,व्यापार तथा बैंकिंग व्यवस्था सब चौपट हो जाती है पूरे देश मे आर्थिक मन्दी आ जाती है। इस. स्थिति को सुधार ने  के लिए  जान बूझकर साख औऱ मुद्रा की मात्रा मे वृद्धि के द्वारा वस्तुओं के मूल्य स्तर मे वृद्धि करने की जो प्रक्रिया अपनाई जाती है उसे मुद्रा-संस्फीती Reflation कहते है

5-Devaluation of money

जब कोई देश अपनी मुद्रा का मूल्य विदेशी मुद्राऔ के रूप मे जान -बूझ कर कम कर देता है तो मूल्य घटाने की इस क्रिया को अवमूल्यन कहा जाता है ।। मुद्रा के अवमूल्यन का परिणाम यह होता है कि देश की मुद्रा की एक इकाई के बदले मे कम विदेशी मुद्रा प्राप्त होने लगती है। स्पष्ट है कि अवमूल्यन का सम्बंध मुद्रा के बाह्य मूल्य से होता है।मुद्रा अवमूल्यन से मुद्रा के आन्तरिक मूल्य पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है।।

Popular Posts